योग अभ्यास के लिए श्वास की मूल बातें
डायाफ्रामिक श्वास, उज्जायी और नाड़ी शोधन को सरल भाषा में समझाया गया है — कौन-से अनुपात उपयोगी हैं और किन गलतियों से चक्कर आते हैं।
योगासन संपादकीय टीम · प्रकाशित · अद्यतन · 4 मिनट का पठन
श्वास वह धागा है जो कुछ खिंचावों को एक अभ्यास में बदल देता है। यह वह हिस्सा भी है जिसे शुरुआती लोग छोड़ देते हैं, अकसर इसलिए कि कोई उसे सीधी भाषा में समझाता ही नहीं।
यह मार्गदर्शिका तीन अभ्यासों को उसी क्रम में समझाती है जिस क्रम में उन्हें सीखना ठीक रहता है। न श्वास रोकना, न उन्नत अनुपात, न ऐसी तकनीकें जिनके लिए शिक्षक की निगरानी ज़रूरी हो।
पहले, नाक से श्वास लें
नाक से लिया गया श्वास हवा को छानता, गर्म करता और नम करता है, और मुँह से श्वास लेने की तुलना में इसकी गति धीमी और लय अधिक नियमित होती है। जब तक किसी आसन में मुँह खोलना खास तौर पर न कहा जाए, श्वास नाक से ही लें — भीतर लेते समय भी और बाहर छोड़ते समय भी।
अगर नाक बंद है, तो बिना संकोच मुँह से श्वास लें। बात शुद्धता की नहीं, लय की है।
1. डायाफ्रामिक श्वास
यहीं से नींव पड़ती है। डायाफ्राम फेफड़ों के नीचे मांसपेशी का एक गुंबद है; जब वह सिकुड़ता है, तो चपटा हो जाता है और निचली पसलियाँ फैलती हैं।
अभ्यास कैसे करें:
- पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़े हुए; या कुर्सी पर सीधी रीढ़ के साथ बैठें।
- एक हाथ निचले पेट पर और एक ऊपरी छाती पर रखें।
- नाक से श्वास भरें और पहले निचला हाथ उठने दें।
- ऊपरी हाथ को बहुत थोड़ा ही हिलने दें।
- धीरे-धीरे श्वास छोड़ें; महसूस करें कि निचला हाथ नीचे बैठ रहा है।
आम गलती यह है कि पेट को पेट की मांसपेशियों से बाहर धकेला जाए, बजाय श्वास को उसे हिलाने देने के। अगर श्वास भरते समय कंधे उठते हैं, तो श्वास ऊपरी छाती में जा रहा है। गति धीमी करें।
तीन से पाँच मिनट अभ्यास करें। रोज़ सिर्फ़ इतना करना भी एक पूरी शुरुआत है।
2. उज्जायी श्वास
उज्जायी वह मृदु, समुद्र-जैसा श्वास है जो अधिकतर विन्यास कक्षाओं में उपयोग होता है। यह गले के पिछले हिस्से में हल्के संकुचन से बनता है, हवा को ज़ोर से धकेलने से नहीं।
इसे कैसे पाएँ: मुँह खोलकर “आह” की तरह फुसफुसाएँ, फिर मुँह बंद करें और वही अनुभूति बनाए रखें। आवाज़ धीमी होनी चाहिए — आपको सुनाई दे, पास बैठे किसी को मुश्किल से।
इसे कैसे उपयोग करें: उसी हल्के संकुचन के साथ नाक से श्वास भरें और छोड़ें। श्वास को गति की रफ़्तार तय करने दें: हर श्वास भरने या छोड़ने पर एक गति। अगर आवाज़ खो जाए, तो लय भी खो गई; गति धीमी करें।
अगर उज्जायी से गला खराब लगने लगे तो इसे न करें। यह मृदु फुसफुसाहट जैसा लगना चाहिए, कभी ज़ोर लगाने जैसा नहीं।
3. नाड़ी शोधन
एक-एक नथुने से श्वास लेना शांत करने वाला और सरल अभ्यास है। ध्यान या सोने से पहले यह अच्छा अभ्यास है।
अभ्यास कैसे करें:
- सीधी रीढ़ के साथ आराम से बैठें।
- बायाँ हाथ घुटने पर रखें। दायाँ हाथ नाक के पास लाएँ।
- अंगूठे से दायाँ नथुना बंद करें; बाएँ से श्वास भरें।
- अनामिका से बायाँ नथुना बंद करें; दाएँ से श्वास छोड़ें।
- दाएँ से श्वास भरें; उसे बंद करें; बाएँ से छोड़ें।
- यह एक चक्र हुआ। पाँच चक्रों से शुरू करें।
श्वास को शांत और बिना ज़ोर के रखें। अगर सिर हल्का लगे, तो रुकें और सामान्य रूप से श्वास लें।
अनुपात, गणित के बिना
सबसे सरल उपयोगी अनुपात है चार भीतर, छह बाहर। इससे श्वास छोड़ने की अवधि बढ़ती है, और यही हिस्सा तंत्रिका तंत्र को शांत करता है।
अगर छह गिनती खींची-तानी लगे, तो तीन और चार लें। अगर आसान लगे, तो कुछ सप्ताह वहीं रुकें, कुछ बदलने से पहले। प्राणायाम में प्रगति निरंतरता से मापी जाती है, संख्याओं से नहीं।
क्या न करें
- शुरुआती के तौर पर श्वास न रोकें। श्वास रोकना निगरानी में किया जाने वाला अभ्यास है।
- लंबी गिनती के लिए ज़ोर न लगाएँ। चक्कर, झुनझुनी और घबराहट रुकने के संकेत हैं।
- गाड़ी चलाते या खड़े होकर तीव्र श्वास अभ्यास न करें।
- लक्षणों को दबाने के लिए श्वास अभ्यास का उपयोग न करें। छाती में दर्द, साँस की गंभीर कमी या सुन्नपन हो तो चिकित्सकीय सहायता लें।
तीन मिनट का दैनिक अभ्यास
बैठें। तीन मिनट। चार गिनती में श्वास भरें, छह में छोड़ें। न ऐप, न संगीत, न श्वास रोकना। जब मन भटके, गिनती पर लौट आएँ।
पूरा अभ्यास इतना ही है, और यह दिन का मिज़ाज बदलने के लिए काफ़ी है।
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