बद्धकोणासन
Baddha Koṇāsana
बैठकर टाँगों से बना एक हीरा, जो कूल्हों को खोलता है और रीढ़ को सीधा रहने का न्योता देता है।
- बुनियादी
- 1–2 मिनट
- कठिनाई 5 में से 1
केवल सामान्य मार्गदर्शन — ऐसी सीमा में अभ्यास करें जो स्थिर और दर्द-रहित लगे।
अभ्यास कैसे करें
- 01
टाँगें सीधी करके बैठें, फिर घुटने मोड़ें और तलवे आपस में मिलाएँ।
- 02
पैरों को शरीर की ओर तब तक लाएँ, जब तक एड़ियाँ आरामदायक दूरी पर न आ जाएँ।
- 03
पैर या एड़ियाँ पकड़ें और नितंबों की हड्डियों पर सीधे बैठें।
- 04
घुटनों को स्वाभाविक रूप से खुलने दें, ज़रूरत हो तो नीचे ब्लॉक का सहारा दें।
- 05
हर श्वास भरते हुए रीढ़ लंबी करें और हर श्वास छोड़ते हुए कूल्हों को ढीला छोड़ें।
लाभ
- कूल्हे और जाँघों के भीतरी हिस्से को खोलता है
- जाँघों के भीतरी हिस्से को खींचता है
- बैठने की स्थितियों में मुद्रा सुधारता है
- ध्यान के लिए अच्छी तैयारी
श्वास
धीमी और समान, श्वास छोड़ते हुए कूल्हों में जगह बनने दें।
सावधानियाँ
विविधताएँ
- लेटकर
- सहारे के साथ पीठ के बल लेटें, यह सुप्त बद्धकोणासन है।
- स्ट्रैप के साथ
- स्ट्रैप को पैरों और कमर के निचले हिस्से के चारों ओर लपेटें।
अभ्यास पत्र
महीने में एक ईमेल: आज़माने के लिए एक क्रम, एक आसन की ठीक से व्याख्या, और पढ़ने लायक कुछ। कोई ऑफ़र नहीं, कोई उलटी गिनती नहीं।
